श्री राम जन भूमि पर तमाम स्वयंभू पत्रकार लिखते नहीं थकते की ये मसला अयोध्या का उन लोगो आपस में सुलझाना चाहिए। तथा कथित राज नेता जिनको जनता नकार चुकी है मुलायम सिंह यादव , बुखारी जो राष्ट्रीयता की बात सुनते है बैल की तरह कूदने लगते है जिनको केवल अपनी कुर्सी तथा अपने पुत्रो की भलाई भर सूझती है वो भी कहने लगते है ये केवल कुछ लोगो के फेसला करने से मामला सुलझ जाये गा ।
इन लोगो को सोचना चाहिए श्री राम जन्म भूमि का मामला केवल भारत के हिंदुवो से नहीं जुरा है ये मामला उन तमाम देशो में रहने वाले हिंदुवो की आस्था की बात है । दुनिया के तमाम हिन्दू , मुस्लिम भी । ईसाई भी यही मानते है । राम का जन्म उसी जगह हुवा जहा आज राम लला विराजमान है । वहा किसी भी हालत में मस्जिद नहीं हो सकती कावं महाज्जिद है इन लोगो की । नेतावो आख खोलो जनता जगी है.
maandag 11 oktober 2010
अयोध्या श्री राम जन्म भूमि क्या केवल भारत के हिन्दू का ?
zondag 10 oktober 2010
समाधान की कोशिशों को बाबा रामदेव का टॉनिक
समाधान की कोशिशों को बाबा रामदेव का टॉनिकOct 11, 02:12 am
अयोध्या, योग गुरू बाबा रामदेव के संदेश ने अयोध्या विवाद के समाधान की कोशिशों के लिए 'टॉनिक' का काम किया। योगगुरू के प्रतिनिधि डॉ. जयदीप आर्य रविवार की शाम महंत ज्ञानदास व हाशिम अंसारी से मिले। उन्होंने बताया कि बाबा रामदेव समाधान की कोशिशों से प्रसन्न हैं। फैजाबाद में 19 नवम्बर को प्रस्तावित योग शिविर में वह दोनों को सम्मानित करना चाहते हैं। डॉ. आर्य ने बाबा रामदेव की ओर से दोनों को निमंत्रण भी दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही बातचीत के जरिये विवाद का समाधान तलाशने में जुटे न्यायमूर्ति पलोक बसु ने महंत ज्ञानदास से करीब बीस मिनट तक वार्ता की। इससे पहले वह हाशिम अंसारी से भी मिले। उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया और शीघ्र अच्छे परिणाम की उम्मीद जतायी।
उधर गुजरात के सूफी संत महदी हसन व सैय्यद जाहिद अली ने आज महंत ज्ञानदास को उनके आश्रम में जाकर सम्मानित किया। इसी कड़ी में आल इंडिया मुस्लिम मजलिस के प्रदेश महासचिव मोहम्मद नईम सिद्दीकी, प्रदेश कोषाध्यक्ष राशिद खान, अब्दुल अजीज व शाहनेवाज खान ने हाशिम अंसारी से मिलकर उनके प्रयासों की सराहना की।
&ठ्ठढ्डह्यश्च
एक-दूसरे पर जताया भरोसा
अयोध्या : अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महन्त ज्ञानदास और बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी ने रविवार को एक दूसरे के प्रति भरोसा जताया। एक तरफ जहां महंत ज्ञानदास ने कहा कि किसी भी कीमत पर हाशिम अंसारी का विश्वास नहीं टूटने दिया जाएगा तो दूसरी तरफ हाशिम अंसारी ने कहा कि उनका महंत ज्ञानदास पर अटूट विश्वास है।
zaterdag 9 oktober 2010
शांति के दुश्मन . शांति के वाहक अब्दुल्ला बुखारी , मुलायम सिंह
शांति के दुश्मन . शांति के वाहक अब्दुल्ला बुखारी , मुलायम सिंह
अभी बहुत दिनों की बात नहीं जब पुत्र वाद के हिमायती मुलायम सिंह तथा पुत्र वाद के उपज अब्द्दुला बुखारी दोनों नयायालय की बात अनने की कश्मे खाते फिरते थे । लोगो को न्यायालय की बात भी मानाने की बिन मागी सलाह देते फिरते थे अपने को शांति का दूत कहते तह आज उन्ही के कर्मो से उनको अशांति कके वाहक शांति के दुश्मन जनता कहने लगी ।
आज इनका चेहरा जिस पर ये मुकौता लगाये घुमाते थे सब को दिखाई पर गया । आज इनकी राजनीती जो लगभग दम तोर चुकी है उसको अयोध्या में आग लगा कर उसको जिन्दा करना चाहते है । लेकिन अब भारत की अंत जाग चुकी है जात के नाम पर मुलायम की राजनिति मर गयी । बुखारी जेसे लोगो को मुस्लिम जनता जान गयी आज एसे ही लोगो के कारन दुनिया हर कोने में इस्लाम बदनाम हो गया । इस्लाम खतरे में है ये नारा अब नहीं चलेगा दुनिया किसी भी कोने में । एसे नारे देने वाले ने केवल अपने परिवार पानी कुर्सी की चांटा में मुसलमानों को लुटते रहे इनका भी मुखौटा उतर गया । आज इनके नरो में दम नहीं रहा जनता कोई बात नहीं करती इन लोगो के बारे में । इनकी च्त्पतःत साफ इनके वक्तव्यों में दिखाई पार्टी है
देखो इनके चेहरे कितने साफ है ।

पुत्रवाद की उपज अब्दुल्ला बुखारी

पुत्रवादी मुलायम सिंह
vrijdag 8 oktober 2010
अयोध्या मसले के समाधान का प्लेटफार्म तैयार
अयोध्या मसले के समाधान का प्लेटफार्म तैयार
Oct 08, 10:09
Oct 08, 10:09
अयोध्या हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर बातचीत से अयोध्या विवाद का समाधान खोजने की कवायद शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंचती दिखी। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के तैयार किए गए इस 'प्लेटफार्म' पर शुक्रवार को बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी व निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि पुजारी रामदास ने न केवल एक-दूसरे का स्वागत किया बल्कि गले भी मिले।
हनुमानगढ़ी से आगे बढ़ी समाधान की इस 'ट्रेन' में रामजन्मभूमि न्यास व मंदिर निर्माण उच्चाधिकार समिति के सदस्य डॉ. राम विलास दास वेदाती भी 'सवार' रहे। इस अवसर पर वार्ता से मंदिर-मस्जिद निर्माण का संकल्प दोहराया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि मंदिर निर्माण में मुस्लिम तथा मस्जिद निर्माण में हिंदू कारसेवा कर सौहार्द की मिसाल पेश करेंगे।
महंत ज्ञानदास ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा के सरपंच महंत भास्कर दास व बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी इस विवाद से संबंधित कानूनी लड़ाई लड़ते हुए करीब 90 वर्ष के हो चुके हैं। दोनों की इच्छा है विवाद का समाधान अयोध्या में ही कर लिया जाए। दोनों पक्षों की इच्छा को देखते हुए समझौते का फार्मूला तैयार किया जा रहा है। दोनों समुदायों के धर्मगुरुओं की रजामंदी के बाद इस फार्मूले को सार्वजनिक किया जाएगा। इसके लिए अयोध्या में दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की बैठक होगी।
महंत भास्कर दास के प्रतिनिधि पुजारी रामदास ने कहा महंत ज्ञानदास व हाशिम अंसारी का प्रयास बेहद सराहनीय है। निर्मोही अखाड़ा इसका स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच की दूरियां अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। इस मसले को यहीं हल कर लेंगे। हाशिम अंसारी ने कहा कि मंदिर भी बनेगा और मस्जिद भी। हमारी कोशिश को दुनिया तो सराहेगी पर कट्टरपंथी ताकतें इस समाधान की कोशिश को तोड़ने की साजिश रच रही हैं। इस कारण सावधानी बरतते हुए 'समाधान की मिठाई' बनने तक फार्मूले को उजागर नहीं किया जाएगा।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य एवं पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती ने कहा वह पहली बार हाशिम अंसारी से मिले। डॉ. वेदांती ने कहा कि बातचीत से अयोध्या विवाद का समाधान समय की मांग है। इस निमित्त चल रहे प्रयासों में वह न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए हैं।
हाशिम के खिलाफ बंटा पर्चा
अयोध्या। बातचीत से अयोध्या विवाद के समाधान में जुटे बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी के खिलाफ शुक्रवार को एक पर्चा बंटवाया गया। उर्दू में छपे इस पर्चे में मुस्लिम समुदाय से विवाद पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के साथ खड़ा होने की अपील की गई है।
अयोध्या मामला: मजिस्ट्रेट विष्णु प्रसाद अग्रवाल करेंगे सुनवाई
रायबरेली। नोटीफिकेशन के इंतजार में लटका अयोध्या मामला एक बार फिर आगे बढ़ने के लिए तैयार हो गया है। उच्च न्यायालय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय विष्णु प्रसाद अग्रवाल को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट बनाया गया है। अब अग्रवाल की अदालत में शासन बनाम लालकृष्ण आडवाणी आदि के मामले की सुनवाई आगमी तिथि 26 अक्टूबर से होगी। अग्रवाल मामले की सुनवाई करने वाले नौवें मजिस्ट्रेट होंगे।
ज्ञात हो कि मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट का स्थानांतरण हो जाने के कारण सुनवाई नहीं हो रही थी, क्योंकि उच्च न्यायलय इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्त करता है। इसके लिए उच्च न्यायालय दीवानी न्यायालय में तैनात मजिस्ट्रेटों में से किसी को नोटीफिकेशन जारी कर मामले की सुनवाई के लिए अधिकृत करता है। जून माह से नोटीफिकेशन के इंतजार में मामले की सुनवाई अधर में लटकी हुई थी, जबकि इस दौरान आठ जून, बारह जुलाई, छह अगस्त, चौदह सितंबर व पांच अक्टूबर की तिथि लग चुकी है। पांच अक्टूबर को प्रभारी मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तिथि नियत कर दी थी। अब विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्त के बाद सुनवाई पर छाये बादल छंट गये। छब्बीस अक्टूबर को मामले की नौंवी गवाह वरिष्ठ आईपीएस अंजू गुप्ता की गवाही फिर शुरू हो जाएगी। अट्ठारह सालों में अग्रवाल नौवें विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में सुनवाई करेंगे। इससे पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट अमिताभ सहाय, विनोद सिंह, एजाज अहमद, आरएमएन मिश्र, आरपी श्रीवास्तव, रईस अहमद, वंशराज व गुलाब सिंह कर चुके हैं।
हनुमानगढ़ी से आगे बढ़ी समाधान की इस 'ट्रेन' में रामजन्मभूमि न्यास व मंदिर निर्माण उच्चाधिकार समिति के सदस्य डॉ. राम विलास दास वेदाती भी 'सवार' रहे। इस अवसर पर वार्ता से मंदिर-मस्जिद निर्माण का संकल्प दोहराया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि मंदिर निर्माण में मुस्लिम तथा मस्जिद निर्माण में हिंदू कारसेवा कर सौहार्द की मिसाल पेश करेंगे।
महंत ज्ञानदास ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा के सरपंच महंत भास्कर दास व बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी इस विवाद से संबंधित कानूनी लड़ाई लड़ते हुए करीब 90 वर्ष के हो चुके हैं। दोनों की इच्छा है विवाद का समाधान अयोध्या में ही कर लिया जाए। दोनों पक्षों की इच्छा को देखते हुए समझौते का फार्मूला तैयार किया जा रहा है। दोनों समुदायों के धर्मगुरुओं की रजामंदी के बाद इस फार्मूले को सार्वजनिक किया जाएगा। इसके लिए अयोध्या में दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की बैठक होगी।
महंत भास्कर दास के प्रतिनिधि पुजारी रामदास ने कहा महंत ज्ञानदास व हाशिम अंसारी का प्रयास बेहद सराहनीय है। निर्मोही अखाड़ा इसका स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच की दूरियां अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। इस मसले को यहीं हल कर लेंगे। हाशिम अंसारी ने कहा कि मंदिर भी बनेगा और मस्जिद भी। हमारी कोशिश को दुनिया तो सराहेगी पर कट्टरपंथी ताकतें इस समाधान की कोशिश को तोड़ने की साजिश रच रही हैं। इस कारण सावधानी बरतते हुए 'समाधान की मिठाई' बनने तक फार्मूले को उजागर नहीं किया जाएगा।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य एवं पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती ने कहा वह पहली बार हाशिम अंसारी से मिले। डॉ. वेदांती ने कहा कि बातचीत से अयोध्या विवाद का समाधान समय की मांग है। इस निमित्त चल रहे प्रयासों में वह न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए हैं।
हाशिम के खिलाफ बंटा पर्चा
अयोध्या। बातचीत से अयोध्या विवाद के समाधान में जुटे बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी के खिलाफ शुक्रवार को एक पर्चा बंटवाया गया। उर्दू में छपे इस पर्चे में मुस्लिम समुदाय से विवाद पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के साथ खड़ा होने की अपील की गई है।
अयोध्या मामला: मजिस्ट्रेट विष्णु प्रसाद अग्रवाल करेंगे सुनवाई
रायबरेली। नोटीफिकेशन के इंतजार में लटका अयोध्या मामला एक बार फिर आगे बढ़ने के लिए तैयार हो गया है। उच्च न्यायालय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय विष्णु प्रसाद अग्रवाल को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट बनाया गया है। अब अग्रवाल की अदालत में शासन बनाम लालकृष्ण आडवाणी आदि के मामले की सुनवाई आगमी तिथि 26 अक्टूबर से होगी। अग्रवाल मामले की सुनवाई करने वाले नौवें मजिस्ट्रेट होंगे।
ज्ञात हो कि मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट का स्थानांतरण हो जाने के कारण सुनवाई नहीं हो रही थी, क्योंकि उच्च न्यायलय इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्त करता है। इसके लिए उच्च न्यायालय दीवानी न्यायालय में तैनात मजिस्ट्रेटों में से किसी को नोटीफिकेशन जारी कर मामले की सुनवाई के लिए अधिकृत करता है। जून माह से नोटीफिकेशन के इंतजार में मामले की सुनवाई अधर में लटकी हुई थी, जबकि इस दौरान आठ जून, बारह जुलाई, छह अगस्त, चौदह सितंबर व पांच अक्टूबर की तिथि लग चुकी है। पांच अक्टूबर को प्रभारी मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तिथि नियत कर दी थी। अब विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्त के बाद सुनवाई पर छाये बादल छंट गये। छब्बीस अक्टूबर को मामले की नौंवी गवाह वरिष्ठ आईपीएस अंजू गुप्ता की गवाही फिर शुरू हो जाएगी। अट्ठारह सालों में अग्रवाल नौवें विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में सुनवाई करेंगे। इससे पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट अमिताभ सहाय, विनोद सिंह, एजाज अहमद, आरएमएन मिश्र, आरपी श्रीवास्तव, रईस अहमद, वंशराज व गुलाब सिंह कर चुके हैं।
woensdag 6 oktober 2010
अयोध्या हाशिम अंसारी की सुरक्षा कड़ी

अयोध्या हाशिम अंसारी की सुरक्षा कड़ी
अयोध्या विवाद में सबसे बुजुर्ग पक्षकार मोहम्मद हाशिम अंसारी की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उन्हें जान से मारने की कथित धमकी मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। उनके निवास पर पीएसी के चार जवान तैनात किए गए हैं। अंसारी फिलहाल यह मसला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश में हैं। हालांकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके बावजूद अंसारी ने बुधवार को फिर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक दोनों में बातचीत हुई। अंसारी के मुताबिक, बातचीत काफी सार्थक रही। ज्ञानदास ने उनसे कहा कि निर्मोही अखाड़े से परिषद बातचीत कर रही है।
आपसी सहमति बनने पर मुस्लिम पक्ष से बात की जाएगी। अंसारी अयोध्या के ही हाजी मेहबूब, बाबू खान व बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और वकील जफरयाब जिलानी से सख्त नाराज हैं। वे कहते हैं कि यदि इन लोगों को लगता है कि ज्ञानदास से बात नहीं करनी चाहिए तो यही बताएं कि आखिर किससे बातचीत हो।
अंसारी ने कहा कि वे अयोध्या में पैदा हुए। यहीं वे जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहे हैं। उनकी चाहत है कि मामला उनके जीवन में ही सुलझ जाए और आने वाली पीढ़ी को इसका दंश नहीं झेलना पड़े।
बिट्टा से मुलाकात:
इस बीच, आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनजीत सिंह बिट्टा ने अंसारी से मुलाकात की। बिट्टा ने कहा कि वे इस समस्या को सुलझाने की शांतिपूर्ण कोशिशों का समर्थन करते हैं।
- ‘राम का भव्य मंदिर बनना है। यह माचिस की डिबिया में तो बन नहीं सकता। भव्य मंदिर के लिए विवादित स्थल के एक-तिहाई के बजाय काफी जमीन की आवश्यकता पड़ेगी।’- त्रिलोकी नाथ पांडेय, अयोध्या विवाद में एक पक्षकार
हाशिम अंसारी को जान का खतरा
Storyअयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर दावेदारी करने वाले एक पक्ष के प्रमुख पैरोकार हाशिम अंसारी ने अपनी जान पर खतरा बताते हुए आरोप लगाया है कि इस मुद्दे को राजनीति का अखाड़ा बनाने वाले लोग उनको रास्ते से हटाने की तरकीबें कर रहे है। अंसारी ने कहा कि जब उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास से भाईचारे का कदम आगे बढ़ाया तो लोगों को बड़ी परेशानी हुई, कि हमारी राजनीतिक अखाड़े बंद कर रहे है हाशिम। इसलिए उनको हर कीमत पर धमकी दो और रास्ते से हटाने की हर तरकीब करो। हालांकि सुन्नी सेंटर वक्फ बोर्ड ने सुलह समके लिए बातचीत करने के वास्ते किसी को भी अधिकृत न किये जाने की बात दोहराई है, लेकिन अंसारी ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने सुलह समझौते की पहल वक्फ बोर्ड के कहने पर ही शुरु की थी। 90 वर्षीय अंसारी का कहना है कि अगर यह मामला बातचीत से तय हो सकता है तो इसके प्रयास किये जाने चाहिए। यह मसला आज-कल, महीने -दो महीने में बातचीत के द्वारा तय हो सकता है, आखिरकार हमारे पास तीन महीने का समय है।
मामूली पैरोकार कहकर बेइज्जती की
हाशिम अंसारी सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के हाल में दिये गये उस बयान से बहुत आहत है, जिसमें जिलानी ने अंसारी को मामूली पैरोकार कहा है। अंसारी का मानना है कि पैरोकार का मतलब केवल बस्ता उठाने वाला और पुकार सुनने वाला से है, मामूली पैरोकार कहकर जिलानी ने उनकी बेइज्जती की है। उन्होंने ने कहा कि वह इस आग को बुझना चाहते है और जिलानी उनकी राह में रोड़ा नहीं बन सकते। अगर जिलानी इस बात के लिए माफी नहीं मागते तो मैं पैरवी छोड़ दूंगा। अंसारी ने आरोप लगाया कि उन्हें चुप करने के लिए लोग उन्हें मारने की साजिश कर रहे है, उन्होंने यह भी कहा कि हम हर कीमत पर भाईचारा कायम रखेंगे, हम सबसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करेंगे भाई लड़ो नहीं इससे मुल्क और कौम का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि लोग जानते है कि इस मुकदमे में वह कितनी ईमानदारी से पिछले 60 सालों से संघर्ष करते आये हैं और उन्होंने लोगों और मीडिया से भी गुहार की है वे लोग उनका समर्थन करें।
मामूली पैरोकार कहकर बेइज्जती की
हाशिम अंसारी सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के हाल में दिये गये उस बयान से बहुत आहत है, जिसमें जिलानी ने अंसारी को मामूली पैरोकार कहा है। अंसारी का मानना है कि पैरोकार का मतलब केवल बस्ता उठाने वाला और पुकार सुनने वाला से है, मामूली पैरोकार कहकर जिलानी ने उनकी बेइज्जती की है। उन्होंने ने कहा कि वह इस आग को बुझना चाहते है और जिलानी उनकी राह में रोड़ा नहीं बन सकते। अगर जिलानी इस बात के लिए माफी नहीं मागते तो मैं पैरवी छोड़ दूंगा। अंसारी ने आरोप लगाया कि उन्हें चुप करने के लिए लोग उन्हें मारने की साजिश कर रहे है, उन्होंने यह भी कहा कि हम हर कीमत पर भाईचारा कायम रखेंगे, हम सबसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करेंगे भाई लड़ो नहीं इससे मुल्क और कौम का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि लोग जानते है कि इस मुकदमे में वह कितनी ईमानदारी से पिछले 60 सालों से संघर्ष करते आये हैं और उन्होंने लोगों और मीडिया से भी गुहार की है वे लोग उनका समर्थन करें।
dinsdag 5 oktober 2010
निर्मोही अखाड़ा मंदिर निर्माण में सहयोग को तैयार
निर्मोही अखाड़ा मंदिर निर्माण में सहयोग को तैयार अयोध्या में रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार एक तिहाई का स्वामित्व पाने वाले निर्मोही अखाड़े ने कहा है कि वह रामजन्म भूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए दूसरे पक्षकार ’ रामलला विराजमान ’ को पूरा सहयोग देने को तैयार है। निर्मोही अखाड़े के महंत भास्कर दास ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए आम सहमति और सहयोग के लिए रामजन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य राम विलास वेदांती ने उनसे बातचीत की है। महंत दास ने बताया कि उन्होंने वेदांती से वादा किया है कि राम मंदिर निर्माण में अखाड़े की तरफ से पूर्ण सहयोग किया जाएगा, मगर शर्त एक ही है कि मंदिर निर्माण के लिए जो भी व्यवस्था बनती है, उसमें निर्मोही अखाड़े का अस्तित्व समाप्त नहीं होना चाहिए।
विवादित स्थल पर मस्जिद के निर्माण के पक्ष में नहीं
उन्होंने कहा कि हम किसी भी सूरत में विवादित स्थल पर मस्जिद के निर्माण के पक्ष में नहीं हैं, यदि मुस्लिम वक्फ बोर्ड उच्च न्यायालय के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देता है, तो हम (अखाड़ा और रामलला विराजमान) दोनो मिलकर मुकदमा लड़ेंगे। बातचीत को सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक बताते हुए वेदांती ने बताया कि महंत भास्कर दास ने यह भी कहा कि विवादित स्थल और उसके आस पास केन्द्र सरकार द्वारा अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि सारी की सारी राम लला की है और हम केन्द्र सरकार से वह जमीन राम मंदिर के निर्माण के लिए दिये जाने की मांग करेंगे। महंत भास्कर दास ने बताया कि यह बातचीत की शुरुआत है और आगे बातचीत करके निर्णय लिया जायेगा। वेदांती ने कहा कि महंत भास्कर दास का तर्क है कि जब अदालत ने सुन्नी वक्फ बोर्ड का मुकदमा ही खारिज कर दिया है तो उसे एक तिहाई जमीन देने का औचित्य कहा रह जाता है।
अयोध्या के संतों से लड़ना नहीं चाहते अंसारी
आपसी सहमति के लिए महंत ज्ञान दास और बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाशिम अंसारी के बीच हुई बातचीत के बारे पूछे जाने पर महंत भास्कर दास ने कहा कि हम रामजन्म भूमि परिसर के आस पास किसी मस्जिद के निर्माण के लिए तैयार नही हैं। कहीं और बनती है तो बनें। इस संबंध में वेदांती ने कहा कि हाशिम अंसारी अयोध्या के संतों से लड़ना नहीं चाहते और वे अब इस विवाद को यही समाप्त कर देना चाहते है और यह राय सार्वजनिक भी कर चुके है। उन्होंने कहा कि यदि सब लोग हाशिम अंसारी की बात मान लें तो देश में हिन्दु मुसलमानों के बीच कभी कोई विवाद होगा ही नहीं। यह पूछे जाने पर कि क्या अंसारी के साथ उनकी भी बात हुई, वेदांती ने कहा कि उनकी बात महंत ज्ञान दास से चल रही है। उल्लेखनीय है कि अयोध्या मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित स्थल को निर्मोही अखाड़े, रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच तीन बराबर भागों में बांटने का फैसला किया है, मगर शर्त यह है कि रामलला विराजमान की मूर्ति आज जहां स्थापित है, वही स्थापित रहेगी।
राजनेता दखल नहीं दें तो सुलझ जाएगा अयोध्या का मुद्दा
ज्योतिपीठाधीश्वर बद्रिकाश्रम के जगद्गुरू शंकराचार्य माधवाश्रम महाराज ने कहा है कि यदि राजनेता दखल न दे तो अयोध्या का श्रीराम जन्म भूमि विवाद सुलझ जाएगा। यहां एक कार्यक्रम में स्वामी माधवाचार्य ने अदालत के फैसले को देश के लिए उचित बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और जल्द ही सुलह हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर मामला उच्चतम न्यायालय में गया तो लंबा खिंचेगा-इसलिए इसका उचित और अंतिम समाधान बातचीत से ही संभव है।
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